ऑटोमेटिक मैन्युअल ट्रांसमिशन (AMT ) क्या है ?जान ले उसके फायदे और नुकसान -What is Automated Manual Transmission (AMT)

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  • दोस्तों http://mysmarttips.in में आपका एक बार फिर से स्वागत है । आज हम जानेंगे आटोमेटिक मैन्युअल ट्रांसमिशन (AMT ) क्या है ?,आटोमेटिक मैन्युअल ट्रांसमिशन काम कैसे करता है ? और उसके फायदे और नुकसान क्या है और AMT ट्रांसमिशन के गियर मोड के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी | तो चलिए शुरू करते है और जानते है ,

  • वर्तमान में भारतीय कार बाजार में तीन प्रकार के स्वचालित गियरबॉक्स पहले से ही मौजूद हैं,

  1. सीवीटी -CVT (लगातार वैरिएबल ट्रांसमिशन)

  2. डीसीटी-DCT (ड्यूल क्लच ट्रांसमिशन)

  3. सरल स्वचालित ट्रांसमिशन

  • ये सभी प्रकार एक गियर और क्लच की व्यवस्था को और अधिक जटिल और पारंपरिक मैनुअल गियरबॉक्स से पूरी तरह से अलग उपयोग करते हैं। हालाँकि, AMT सटीक गियर और क्लच सेटअप का उपयोग करता है जैसा कि मैनुअल ट्रांसमिशन में देखा जाता है।

  • इस ट्रांसमिशन प्रणाली पूरी तरह मैन्युअल की तरह ही है बस मैन्युअल में हम गियर पैडल और क्लच का इस्तमाल हात और पैर से मैन्युअली करते है और AMT प्रणाली पूरी तरह संचालित होती है ।

  • गियर लीवर और कार के केबिन के अंदर क्लच पेडल के स्थान पर, जो मैन्युअल रूप से चालक द्वारा संचालित होते हैं, एएमटी ट्रांसमिशन में इंजन के अंदर एक हाइड्रोलिक एक्ट्यूएटर सिस्टम लगाया जाता है जो दोनों को संचालित करता है। एएमटी प्रणाली के एक्चुएटर्स कार के ईसीयू से जुड़े हैं, जो इसे इनपुट देता है और आउटपुट गियर और क्लच में जाता है।

  • गियर शिफ्ट पैटर्न कारखाने में फिट कर दिय जाते है जैसे गाड़ी की गति बढ़ने पर आटोमेटिक गियर बढ़ाना या गति कम होने पर गियर कम करना होता है और उस डेटा को ECU द्वारा संग्रहीत किया जाता है।

  • इसलिए जब भी RPM एक निश्चित स्तर पर चढ़ता है, ECU स्वचालित रूप से सिंक्रनाइज़ेशन में क्लच और गियरबॉक्स दोनों को संचालित करने के लिए एक्ट्यूएटर्स को नियंत्रित करता है।

  • यह बिल्कुल एक स्वचालित गियरबॉक्स की तरह कार्य करता है क्योंकि इसमें क्लच पेडल नहीं है और कुछ मामलों में, केबिन के अंदर भी गियर लीवर नहीं है । हालांकि ज्यादातर मामलों में, तीन ड्राइव मोड, आर (रिवर्स), एन (न्यूट्रल) और डी (ड्राइव) के साथ गियर लीवर है।उसके साथ ही पार्किंग मोड पी भी शामिल होता है | ड्राइव मोड के समानांतर ही मैनुअल मोड में शिफ्टिंग का भी विकल्प है।

  • आटोमेटिक ट्रांसमिशन के मोड

  • रिवर्स (R)-

    इस मोड में आप गाड़ी को रिवर्स ले जा सकते हो |

  • न्यूट्रल (N )-

    जब गाड़ी खड़ी हो तब न्यूट्रल (N ) मोड का इस्तेमाल कीजिये |

  • ड्राइव (D )-

    जा भी गाड़ी को आप ड्राइव करना चाहते हो , तो ड्राइव मोड का उपयोग करे |

  • पार्किंग (P )-

    जब गाड़ी पार्क कर रहे हो तो पार्क मोड का उपयोग करना चाहिए |

  • स्पोर्ट्स (S )-

    जब आप लम्बे रास्ते या हाईवे पर जा रहे हो तब स्पोर्ट्स मोड का इस्तेमाल करे |

  • ऑटोमेटिक ट्रांसमिशन के फायदे

  • ऑटोमेटिक ट्रांसमिशन में ड्राइवर को गियर चेंज करनी की जरूरत नहीं होती। इससे हाइवे पर या लॉन्ग ड्राइव पर जा रहें है तो ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन से और भी ज्यादा आराम मिलेगा ।

  • ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन इंजन के जरूरत के मुताबिक खुद ही गियर चेंज हो |

  • अपने देश की खराब सड़कों पर आम कारों के मुकाबले ऑटोमेटिक कारों को चलाना और उनको हैंडल करना आसान होता है।

  • ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन के नुकसान

  • ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन, मैनुअल और AMT के मुकाबले गियरचेंज होने में थोड़ा वक्त लेते हैं। यानी बदलाव के लिए यह कुछ सेकंड्स का वक्त लगता है।

  • ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन की मेंटेनेंस मैन्युअल के मुकाबले थोड़ी ज्यादा होती है साथ ही सर्विस के दौरान खर्चा भी ज्यादा आता है।

  • ट्रैफिक में मैन्युअल ट्रांसमिशन वाली कारों के मुकाबले ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन वाली कारों में फ्यूल की खपत ज्यादा होती है|

  • ओवरटेक करने में दिक्कत थोड़ी होती है क्योंकि ऑटोमैटिक कार में आप अपनी इच्छाानुसार पावर नहीं ले पाते , जबकि मैनुअल गियरबाक्स में आप अपनी इच्छा नुसार गियर का प्रयोग करतें है।

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