Golden girl of India-Hima Das- हिमा दास की जीवनी

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दोस्तों http://mysmarttips.in में आपका एक बार फिर से स्वागत है । आज हम जानते है भारत की गोल्डन गर्ल हिमा दास के बारे में ,तो चलिए शुरू करते है और जानते है भारत की नई स्पोर्ट्स आइकॉन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी ,

पूरा नाम-हीमा रोनजित दास
उपनाम– ढिंग एक्सप्रेस
राष्ट्रीयता-भारतीय
जन्म-9 जनवरी 2000 (आयु 19) ढिंग, नगाँव, असम
निवास-ढिंग, नगाँव, असम
ऊंचाई-5‘5 feet
वज़न-55 KG

देश– भारत
खेल-ट्रैक एंड फील्ड
कोच-निपोन दास

हिमा दास की कामयाबी

भारत खेल जगत की नई आइकॉन महिला धावक हिमा दास ने दो हफ्ते के अंदर ही तीसरा स्वर्ण पदक जीता है। हिमा दास ने क्लांदो मेमोरियल ऐथलेटिक्स प्रतियोगिता में महिलाओं की 200 मीटर स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता। हिमा दास ने इस रेस को 23.43 सेकंड में पूरा किया और पहले पायदान पर रही। 


हिमा ने दो जुलाई को इस साल की अपनी पहली प्रतिस्पर्धा 200 मीटर रेस में 23.65 सेकेंड का समय निकालर गोल्ड मेडल जीता था। यह रेस पोलैंड में हुई पोजनान एथलेटिक्स ग्रांड प्रिक्स के तहत हुई थी।  

इसके बाद, विश्व जूनियर चैंपियन और 400 मीटर में राष्ट्रीय रिकॉर्डधारक हिमा ने जुलाई आठ को पोलैंड में हुए कुंटो एथलेटिक्स टूर्नामेंट में 200 मीटर की रेस में 23.97 सेकेंड के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया।


हिमा दास 

हिमा दास जो एक भारतीय धावक है। वो आईएएएफ वर्ल्ड अंडर-२० एथलेटिक्स चैम्पियनशिप की 400 मीटर दौड़ स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी है। हिमा ने 400 मीटर की दौड़ स्पर्धा में 51.46 सेकेंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता।

अप्रैल 2018 में गोल्ड कोस्ट में खेले गए कॉमनवेल्थ खेलों की 400 मीटर की स्पर्धा में हिमा दास ने 51.32 सेकेंड में दौर पूरी करते हुए छठवाँ स्थान प्राप्त किया था। तथा 4X400 मीटर स्पर्धा में उन्होंने सातवां स्थान प्राप्त किया था।

हाल ही में गुवाहाटी में हुई अंतरराज्यीय चैंपियनशिप में उन्होंने गोल्ड मेडल अपने जीता था। इसके अलावा 18वें एशियन गेम्स 2018 जकार्ता में हिमा दास ने दो दिन में दूसरी बार महिला 400 मीटर में राष्ट्रीय रिकार्ड तोड़कर रजत पदक जीता है ।

व्यक्तिगत जीवन

हिमा दास का जन्म असम राज्य के नगाँव जिले के कांधूलिमारी गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम रोनजीत दास तथा माता का नाम जोनाली दास है।

उनके माता पिता चावल की खेती करते हैं। ये चार भाई-बहनों से छोटी हैं। दास ने अपने विद्यालय के दिनों में लड़कों के साथ फुटबॉल खेलकर क्रिडाओंं मेंं अपनी रुचि की शुरुआत की थी। वो अपना कैरियर फुटबॉल में देख रही थीं और भारत के लिए खेलने की उम्मीद कर रही थीं।

फिर जवाहर नवोदय विद्यालय के पीटी टीचर शमशुल हक के सलाह पर उन्होंने दौड़ना शुरू किया। शमशुल हक़ ने उनकी पहचान नगाँव स्पोर्ट्स एसोसिएशन के गौरी शंकर रॉय से कराई। फिर हिमा दास जिला स्तरीय प्रतियोगिता में चयनित हुईं और दो स्वर्ण पदक भी जीतीं। 

हिमा का संघर्ष-

जब 2017 में हिमा दास गुवाहाटी में जिला स्तरीय प्रतियोगिता के दौरान ‘स्पोर्ट्स एंड यूथ वेलफेयर हिस्सा लेने आई थीं तब उनकी मुलाकात एक एथलेटिक्स के कोच निपोन दास से हुई।

उस कोच ने ही हिमा को एथलीट की शिक्षा दी। अच्छे कोचिंग के लिए गुवाहाटी भेजने के लिए हिमा के माता-पिता के पास पैसे नहीं थे, ऐसे में वहां हिमा के रहने खाने का खर्चा कोच ने उठाया।

उन्होंने हिमा दास के परिवार वालों को हिमा को गुवाहाटी भेजने के लिए मनाया जो कि उनके गांव से 140 किलोमीटर दूर था। पहले मना करने के बाद हिमा दास के घर वाले मान गए।

और बादमें हिमा का प्रदर्शन देखकर उनकी मेहनत सफल हुई ऐसा हम कह सकते है।

हिमा दास की व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन- 

100 मीटर- (11.74 सेकेंड )
200 मीटर- (23.10 सेकेंड )
400 मीटर- (50.79 सेकेंड )
4X400 मीटर रिले- (3:33.61)

हमने इस ब्लॉग में जानी हिमा दास की संघर्ष की कहानी ,
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